इंदौर। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आईवीएफ और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) को लेकर ‘जेनोविया आईएसएआर’ कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्त्री रोग विशेषज्ञों और मेडिकल छात्रों को ओव्यूलेशन, इन्फर्टिलिटी, भ्रूण विज्ञान और आईवीएफ की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में आईएसएआर के 75 प्रोजेक्ट पूरे होने के अवसर पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। आईएसएआर की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. आशा बख्शी ने बताया कि ‘जेनोविया’ प्रोजेक्ट के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में नई पीढ़ी के डॉक्टरों और छात्रों तक रिप्रोडक्टिव साइंस की आधुनिक जानकारी पहुंचाई जा रही है।
ऑनलाइन सत्र में आईएसएआर प्रेसिडेंट डॉ. सुनीता तंडुलवाडकर ने कहा कि आईवीएफ के क्षेत्र में तकनीक लगातार विकसित हो रही है। मातृत्व की उम्मीद लेकर दंपती विशेषज्ञों के पास आते हैं, इसलिए डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक और अनुभव के आधार पर बेहतर उपचार देने का प्रयास करें।
एमपी आईएसएआर की चेयरपर्सन डॉ. अर्चना बसेर ने कहा कि कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इन्फर्टिलिटी के बढ़ते मामलों, ओव्यूलेशन की समस्याओं, भ्रूण विज्ञान और आधुनिक एआरटी तकनीकों पर जानकारी साझा की। वहीं विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा देवधर और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. पूजा जैन ने भी रिप्रोडक्टिव साइंस में नई तकनीकों और बेहतर उपचार-पद्धतियों की भूमिका पर बात रखी।
कार्यक्रम में मयंक वेलफेयर फाउंडेशन के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया, वाइस चेयरमैन मयंकराज सिंह भदौरिया, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजीव नारंग सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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