गोपालगंज पुलिस की तफ्तीश में यह लगभग साबित हो चुका है कि जब्त रकम रिटायर्ड इंजीनियर रमेश अहिरवार की ही है। दरअसल, बीती 16 अगस्त को अवैध हथियार की सूचना पर जब पुलिस ने दबिश दी, तो घर में रखी गोदरेज कंपनी की अलमारी से नोटों से भरे बैग मिले थे। इसी अलमारी के बारकोड ने पुलिस को मुख्य आरोपी तक पहुंचाने का सबसे पुख्ता सबूत दिया।
एसपी अनुराग सुजानिया के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी मनीष सिंघल ने अलमारी पर लगे बारकोड के जरिए गुजराती बाजार स्थित गोदरेज आउटलेट का सुराग निकाला। शोरूम से मिला बिल अक्टूबर 2025 का था, जो इंजीनियर की पत्नी सहोद्रा बाई के नाम से 34 हजार रुपये में काटा गया था। इस बिल ने इंजीनियर के उन दावों की हवा निकाल दी जिसमें उन्होंने इस रकम से कोई भी संबंध होने से इनकार किया था। इसके अलावा रचना बाई (आरोपी अंकित और सौरभ की मां) की वयोवृद्ध मौसी श्यामा बाई के बैंक खाते में इंजी. रमेश द्वारा अक्टूबर में ही 50 हजार रु. का ट्रांजेक्शन करना ये साबित करता है कि वह इस परिवार के संपर्क में था। बता दें कि श्यामाबाई शनीचरी वार्ड में रहती है लेकिन वह अधिकांश समय रचना बाई के इसी मकान में बनी रहती है।
गड्डियों में कम थे नोट, रिश्वत के खेल की खुली पोल
बरामद रकम के 'राउंड फिगर' में न होने (3 करोड़ 2 लाख 12 हजार रुपये) को लेकर उठ रहे सवालों से भी पर्दा उठ गया है। कार्रवाई में शामिल अधिकारियों के अनुसार, बैगों में रखी 500-500 रुपये की गड्डियों में से अधिकांश में 25 से 30 नोट गायब थे, जबकि एक गड्डी में महज 65-66 नोट ही निकले। भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर रिश्वत की भारी-भरकम रकम मिलने पर उसे तुरंत गिना नहीं जाता; इसी का फायदा उठाकर ठेकेदार या बिचौलिए गड्डियों में से नोट कम कर लेते हैं, जिससे यह अजीबोगरीब आंकड़ा सामने आया। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस इस पूरे गठजोड़ की परतें उधेड़ने में जुटी है।

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