इंदौर। इंडेक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 21 वर्षीय 37 सप्ताह की गर्भवती महिला का सफल उपचार कर मां और नवजात दोनों को सुरक्षित बचाया। हादसे में महिला के बाएं पैर की फीमर हड्डी में फ्रैक्चर के साथ गंभीर डीग्लोविंग इंजरी हुई थी, जिसमें पैर की त्वचा और अंदरूनी ऊतक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
गर्भावस्था के अंतिम चरण और महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देरी किए आपातकालीन उपचार शुरू किया। चिकित्सकों ने सीजेरियन सेक्शन के साथ घायल पैर का एक्सटर्नल फिक्सेशन किया। उपचार के दौरान महिला को 8 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। ऑपरेशन के बाद महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। फिलहाल मां और नवजात दोनों की हालत स्थिर बताई गई है।
हादसे के बाद गंभीर हालत में पहुंची थी महिला
सड़क दुर्घटना के बाद महिला को गंभीर हालत में इंडेक्स हॉस्पिटल लाया गया था। जांच में बाएं पैर की फीमर में फ्रैक्चर और डीग्लोविंग इंजरी की पुष्टि हुई। 37 सप्ताह की गर्भावस्था के कारण डॉक्टरों के सामने एक साथ मां और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा की चुनौती थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स तथा ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग की टीम ने तत्काल समन्वय के साथ उपचार शुरू किया। आपातकालीन सीजेरियन सेक्शन के दौरान ही पैर को स्थिर करने के लिए एक्सटर्नल फिक्सेशन किया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान शिशु की स्थिति पर भी लगातार निगरानी रखी गई।
टीमवर्क से मिली सफलता
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एचओडी ले. कर्नल डॉ. अजय सिंह ठाकुर ने बताया कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में गंभीर सड़क दुर्घटना, फ्रैक्चर और डीग्लोविंग इंजरी के कारण यह बेहद जटिल आपातकालीन स्थिति थी। ऐसे मामलों में समय पर निर्णय और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
उपचार टीम में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से डॉ. प्रिया गुप्ता, एनेस्थीसिया से डॉ. वंशिका गर्ग, ऑर्थोपेडिक्स जेआर डॉ. प्रियम सिंह राजावत, डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. भानु प्रताप, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग जेआर डॉ. अदिति दीवान, डॉ. राजेश्वरी चंदावत तथा एनेस्थीसिया जेआर डॉ. तनिषा सांघी, डॉ. करण श्रीवास्तव और डॉ. अनुष्ठा दुबे शामिल रहे।
महिला को आगे की निगरानी और पैर की चोट के उपचार के लिए चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है।


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