इंदौर। शहर के पिपल्याहाना तालाब के पानी का रंग हरा पड़ने से इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक तालाब में गंदा पानी मिलने की आशंका जताई गई है। मामले में पानी के सैंपल लेकर जांच कराने की मांग की गई है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार जिम्मेदार विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तालाब में छोड़े जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता है। आसपास के प्रमुख भूजल रिचार्ज प्वाइंट भी इसी क्षेत्र में हैं, ऐसे में तालाब के पानी में किसी तरह का प्रदूषण होने पर उसके असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
केंद्र ने मांगा सैंपल, अफसरों ने नहीं भेजा
रिपोर्ट के मुताबिक पानी की स्थिति को देखते हुए केंद्र की ओर से पानी का सैंपल मांगा गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक सैंपल नहीं भेजे जाने की बात सामने आई है। विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भूजल बोर्ड की पहली रिपोर्ट में दूषित मिले पानी को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद दोबारा जांच और सैंपलिंग की जरूरत महसूस की गई।
हर महीने एसटीपी के पानी की जांच का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, एसटीपी के पानी की गुणवत्ता की जांच हर महीने की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि एसटीपी से निकलने वाला पानी मानकों के अनुसार उपचारित होकर तालाब क्षेत्र तक पहुंचता है। हालांकि, तालाब में पानी हरा होने के बाद इसकी वास्तविक गुणवत्ता को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौरतलब है कि जुलाई में नगर निगम ने पिपल्याहाना तालाब में वर्षाजल पहुंचाने के लिए स्टॉर्म-वॉटर लाइन से पाइपलाइन और चैनल तैयार किया था। इस काम पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे।

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