इंदौर ने आज अपने वीर सपूत मेजर हमज़ा आरिफ को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम दर्शन के लिए जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हजारों की संख्या में शहरवासी, सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
अंतिम यात्रा के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "मेजर हमज़ा अमर रहें" के नारों के बीच लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
मेजर हमज़ा आरिफ का निधन राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान हुए सड़क हादसे में हुआ था। सेना का वाहन एक ऊंट से टकरा गया था, जिसमें मेजर हमज़ा ने देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। हादसे में दो अन्य जवान भी घायल हुए थे।
मेजर हमज़ा इंदौर के राजेंद्र नगर क्षेत्र के निवासी थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान हर आंख नम थी और हर जुबान पर अपने वीर सपूत के लिए सम्मान था। लोगों ने कहा कि मेजर हमज़ा का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।

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