इंदौर, मध्य प्रदेश। इंदौर की स्कीम नंबर 74 में रहने वाली मिनी सूद ने आज एक प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी आपबीती साझा की। मिनी सूद का आरोप है कि वे पिछले साढ़े चार वर्षों से अपनी दो बेटियों—पृषा सूद (15 वर्ष) और दिविशा सूद (9 वर्ष)—से अलग रहने को मजबूर हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद उन्हें न तो बेटियों से मिलने दिया जा रहा है और न ही फोन पर बात करने दी जा रही है।
मुंबई से कोल्हापुर तक छिपाए रखे बच्चे
मिनी सूद के अनुसार, मार्च 2022 तक उनकी बेटियां इंदौर के सेंट पॉल स्कूल में पढ़ रही थीं। पति से विवाद के बाद जब वे मुंबई (घाटकोपर) बच्चों से मिलने गईं, तो उनके साथ मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद बच्चों को कोल्हापुर में ननद के पास छिपाकर रख दिया गया। मिनी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका लगाई और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से केस इंदौर ट्रांसफर हुआ। कोर्ट से बच्चों से मिलने और बात करने का ऑर्डर मिलने के बावजूद उन्हें बेटियों से दूर रखा जा रहा है।
टॉयलेट तक में CCTV कैमरे, घर तोड़कर कर दिया बेघर
मिनी सूद ने अपने पति आदर्श सूद, जेठ समीर सूद और जेठानी हनी सूद पर गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं:
निजता का हनन: बेडरूम के अंदर-बाहर और टॉयलेट तक में सीसीटीवी कैमरे लगाकर उनकी निजता का हनन किया गया।
घर में तोड़फोड़ और चोरी: कोर्ट से रहने का स्टे (Residential Order) मिलने के बावजूद घर के ताले, खिड़कियां, टॉयलेट का कमोड और बिजली का बोर्ड तोड़ दिया गया। घर से सोने के जेवर, कपड़े, गद्दे और गैस सिलेंडर तक चोरी कर लिए गए।
जानलेवा हमला: आधी रात को घर पर पथराव कर उनकी हत्या का प्रयास भी किया गया, जिसके बाद वे अब हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन से न्याय की गुहार
हाल ही में मिनी की बड़ी बेटी का एक्सीडेंट हो गया और उसे फ्रैक्चर आया है, लेकिन फिर भी उन्हें मिलने नहीं दिया गया। मिनी सूद ने इंदौर पुलिस व प्रशासन से गुहार लगाई है कि कोर्ट के आदेशों का पालन करवाकर उन्हें बेटियों से मिलाया जाए और अमानवीय व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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