इंदौर। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, फास्ट फूड, तनाव, मोटापा, धूम्रपान और शराब के बढ़ते सेवन के कारण पेट और लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं बीमारियों के आधुनिक उपचार और नई तकनीकों पर चर्चा के लिए 1 और 2 अगस्त को इंदौर में गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। मेदांता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा गट क्लब इंदौर के सहयोग तथा इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (आईएसजी) मध्यप्रदेश चैप्टर की वार्षिक बैठक के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, एंडोस्कोपिस्ट और फिजिशियन शामिल होंगे।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. हरि प्रसाद यादव ने बताया कि पेट और लिवर से जुड़ी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि लगातार एसिडिटी, अपच, पेट दर्द, निगलने में परेशानी, अचानक वजन कम होना, बार-बार पीलिया होना या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह से कई गंभीर बीमारियों का सफल उपचार संभव है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एंडोस्कोपी, ईयूएस, ईआरसीपी, आधुनिक लिवर डिजीज मैनेजमेंट और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों ने उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है। आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से पित्त की नली में फंसी जटिल पथरी का भी बिना बड़ी सर्जरी सफल उपचार किया जा रहा है।
दो दिवसीय सम्मेलन में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस-बी, पीलिया, गैस और अपच, लिवर ट्रांसप्लांट, जीआई एंडोस्कोपी, एडवांस एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक व्याख्यान, केस आधारित चर्चा और विशेषज्ञ पैनल आयोजित किए जाएंगे। डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सकों तक नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और वैश्विक उपचार मानकों को पहुंचाना है, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिल सके।

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