रूप चौदस क्यों मनाई जाती है? जानिए नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व और इस दिन की खास परंपराएं

 

दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली रूप चौदस का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करते हैं, शरीर पर तेल और उबटन लगाते हैं तथा भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।

क्यों मनाई जाती है रूप चौदस?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। इसी वजह से इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। वहीं, रूप चौदस के दिन उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे रूप-सौंदर्य में निखार आता है और शरीर की शुद्धि होती है।

रूप चौदस पर क्या करते हैं?

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल मालिश और उबटन लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, यमराज के नाम का दीपदान और घर में दीपक जलाने की परंपरा भी है। मान्यता है कि यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

रूप चौदस का पर्व बाहरी सुंदरता के साथ-साथ तन और मन की शुद्धता, बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में सकारात्मकता का संदेश भी देता है।

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