सागर। जहरीली शराबकांड के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही इरशाद वली को सागर का नया आईजी बनाया गया है, जबकि दिलीप कुमार ने संभागायुक्त का पद संभाल लिया है।
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 22 तक पहुंच गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद सागर पहुंचे और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सीएम ने अधिकारियों को फ्री हैंड देते हुए कहा कि अवैध शराब के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी कि दोबारा कोई इस तरह का दुस्साहस करने की हिम्मत न करे। अवैध शराब से जुड़े लोगों की अवैध संपत्तियों और अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेशभर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही गई है।
नकली शराब बनाने का नेटवर्क सामने आया
जांच में पुलिस को नकली शराब तैयार करने के ठिकाने का भी पता चला है। पुलिस के मुताबिक ततरवारा गांव के एक खेत से 164 क्वार्टर 'सागर गोल्ड प्लेन' मदिरा, 27 लीटर अमानक शराब और शराब बनाने-पैकिंग का सामान बरामद हुआ। जांच में करीब 50 पेटी नकली शराब तैयार कर ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार शराब को 'सागर गोल्ड' के नाम से पैक कर बाजार में पहुंचाया जाता था।
मामले में अब तक 33 नामजद आरोपियों में से 16 की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस अवैध शराब के निर्माण, पैकिंग और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
जांच में मेथाइल अल्कोहल का एंगल
मामले की जांच में शराब में मेथाइल अल्कोहल की मौजूदगी सामने आने की रिपोर्ट भी सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ मौतों को मेथाइल अल्कोहल विषाक्तता से जोड़ा गया है।
इससे पहले प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। जांच में मौतों की वास्तविक वजह के साथ-साथ शराब कहां बनी, किसने स्टोर की, किस नेटवर्क से सप्लाई हुई और क्या किसी विभागीय अधिकारी की लापरवाही रही—इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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