दतिया हार के बाद MP भाजपा में मंथन तेज, संगठन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; बड़े बदलाव के संकेत

 


दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर मंथन तेज हो गया है। पार्टी के लिए यह हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि दतिया को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है और चुनाव में पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी थी। इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हरा दिया।

दतिया नतीजे के बाद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने संगठन के स्तर पर समीक्षा और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कहा है कि पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

दतिया में हार के बाद पार्टी ने स्थानीय संगठन को लेकर भी सख्त कदम उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दतिया जिले में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों को हटाया गया है और जिला संगठन में व्यापक फेरबदल किया गया है। इसे चुनाव के दौरान सामने आए संगठनात्मक मतभेद और कथित भितरघात की शिकायतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

लगातार उपचुनावों के नतीजे भी चर्चा में

दतिया से पहले 2024 में मध्य प्रदेश की विजयपुर सीट भाजपा के हाथ से निकल गई थी। कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को 7 हजार से अधिक वोटों से हराया था। वहीं बुधनी में भाजपा ने जीत दर्ज की, लेकिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने चुनावी प्रदर्शन की तुलना में जीत का अंतर काफी कम रहा। 2024 के उपचुनाव में भाजपा के रमाकांत भार्गव ने कांग्रेस के राजकुमार पटेल को 13,901 वोटों से हराया था।

अमरवाड़ा में भी भाजपा जीत तो दर्ज करने में सफल रही, लेकिन मुकाबला बेहद करीबी रहा। भाजपा के कमलेश शाह ने कांग्रेस के धीरन शाह को करीब 3 हजार वोटों से हराया था।

ऐसे में दतिया की हार ने संगठन की चुनावी रणनीति, स्थानीय गुटबाजी, उम्मीदवार चयन और बूथ स्तर के प्रबंधन को लेकर सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। दतिया में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था, जबकि टिकट को लेकर चुनाव से पहले ही स्थानीय स्तर पर असंतोष देखने को मिला था।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दतिया हार के बाद मध्य प्रदेश भाजपा संगठन के भीतर समीक्षा का दौर शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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