इंदौर। शहर में 12 दिनों के अंतराल के बाद 69वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। शुजालपुर निवासी 54 वर्षीय मंडी सचिव कैलाश नारायण पाठक के संभावित ब्रेन-डेथ के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।
सबसे भावुक पहलू यह रहा कि पत्नी मनोरमा ने पति के अंगदान की सहमति पर हस्ताक्षर करने से पहले खुद अंगदान और देहदान का संकल्प लिया। इसके बाद परिवार ने सभी संभावित अंगों के दान की सहमति दी।
तकनीकी कारणों से दो किडनी और नेत्रदान ही संभव हो सका। शैल्बी हॉस्पिटल से बनाए गए दो ग्रीन कॉरिडोर के जरिए एक किडनी चोइथराम हॉस्पिटल और दूसरी एमिनेंट हॉस्पिटल के मरीज को प्रत्यारोपित की गई। नेत्रदान शंकरा आई हॉस्पिटल के माध्यम से हुआ।
पूरी प्रक्रिया में करीब 60 घंटे तक सेवादारों, डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की टीमें जुटी रहीं। सांसद शंकर लालवानी सहित SOTO, पुलिस-प्रशासन और चिकित्सकीय टीम का भी सहयोग रहा।
अंगदान के बाद कैलाश नारायण पाठक के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सुबह 7:30 बजे शुजालपुर स्थित उनके घर के लिए रवाना किया गया।
एक परिवार का दुःख, दूसरे परिवारों के लिए जिंदगी की नई उम्मीद बन गया। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है।

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