रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के पवित्र बंधन का पर्व माना जाता है। परंपरा में बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है। हालांकि धार्मिक परंपरा में रक्षासूत्र का अर्थ केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा है। प्राचीन मान्यताओं में भी रक्षासूत्र संकट और अनिष्ट से रक्षा के संकल्प के रूप में बांधा जाता था।
ऐसे में अगर किसी बहन का भाई नहीं है, तो वह अपनी बहन की कलाई पर राखी बांध सकती है। इसे बहनों के बीच प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प के रूप में किया जा सकता है। हालांकि इसे पारंपरिक शास्त्रीय रक्षाबंधन की मुख्य विधि नहीं कहा जाएगा, क्योंकि पारंपरिक रूप से बहन द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा प्रमुख है।
धार्मिक भाव से देखा जाए तो राखी का मूल संदेश रक्षा, मंगलकामना, प्रेम और विश्वास है। इसलिए भाई न होने पर बहन-बहन का एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधना श्रद्धा और स्नेह के साथ किया जा सकता है।

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