पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्र नेता जेल से रिहा, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप



इंदौर। मध्यप्रदेश में पेपर लीक, भर्ती घोटालों और युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर छात्र संगठन एक बार फिर सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं। इंदौर में हुई प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया है कि सरकार पेपर लीक और भर्ती घोटालों के दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय इनके खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र नेताओं को निशाना बना रही है।

संगठन के अनुसार, 23 जुलाई को इंदौर में नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) से जुड़े छह छात्र नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन छात्र नेताओं को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वे पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। संगठन का कहना है कि सभी छात्र नेताओं को जेल भेजा गया और 26 जुलाई को उनकी रिहाई हुई।

संगठन ने सवाल उठाया कि यदि छात्र पेपर लीक रोकने और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे थे, तो उनका अपराध क्या था? उन्होंने कहा कि सरकार को पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि छात्रों की आवाज दबानी चाहिए।

संगठन ने वर्ष 2023 की पटवारी भर्ती परीक्षा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भर्ती घोटाले की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन का आरोप है कि रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और दोषियों को संरक्षण मिलने की आशंका बढ़ रही है।


छात्र संगठन की प्रमुख मांगें

पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।

नियमित और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया लागू की जाए।

पटवारी भर्ती सहित सभी भर्ती घोटालों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

पेपर लीक और भर्ती घोटालों के दोषियों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

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