महाकालेश्वर मंदिर के समीप शासकीय भूमि के कथित निजी हस्तांतरण एवं व्यावसायिक उपयोग

 महाकालेश्वर मंदिर के समीप शासकीय भूमि के कथित निजी हस्तांतरण एवं व्यावसायिक उपयोग को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका; माननीय न्यायालय ने जारी किया नोटिस।


इंदौर .  श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन के समीप स्थित बहुमूल्य शासकीय भूमि के कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने, उसके पश्चात निजी कंपनी को हस्तांतरित किए जाने तथा वर्तमान में श्रद्धालुओं के लिए उपयोग में आ रही पार्किंग भूमि के संभावित व्यावसायिक उपयोग को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर के समक्ष एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गई है। उक्त जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मामले में जवाब तलब किया गया है।


यह जनहित याचिका राजेंद्र कुवेल द्वारा WP No. 27733/2026 के रूप में प्रस्तुत की गई है। याचिका में राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम उज्जैन सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री जयेश गुरनानी ने पैरवी की। याचिका दिनांक 14.07.2026 को प्रस्तुत की गई है।


याचिका के अनुसार, ग्राम कस्बा उज्जैन, पटवारी हल्का क्रमांक 05, तहसील एवं जिला उज्जैन स्थित सर्वे नंबर 3664/1, 3666/1, 3690/1/1 एवं 3691/1, कुल रकबा लगभग 1.877 हेक्टेयर, मूल रूप से वर्ष 1950 के राजस्व अभिलेखों में “पट्टा तकायमी कारखाना” के रूप में शासकीय भूमि के तौर पर दर्ज थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाद के वर्षों में उक्त भूमि को बिना किसी वैध न्यायिक अथवा सक्षम राजस्व आदेश के निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया, जिसके बाद भूमि के एक हिस्से का हस्तांतरण Utopia Hotel and Resorts Private Limited के पक्ष में किया गया जिसके निदेशक श्री चिंतामन मालवीय हैं, जो आलोट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।


याचिका के अनुसार, संबंधित भूमि का एक हिस्सा वर्तमान में हरि फाटक पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जहां श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उक्त भूमि के निजी व्यावसायिक उपयोग अथवा उस पर निर्माण होने की स्थिति में श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हो सकती है तथा आगामी सिंहस्थ के दौरान यातायात, भीड़ प्रबंधन एवं सार्वजनिक सुविधा के समक्ष गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया है कि संबंधित भूमि से लगी हुई सर्वे नंबर 3677 की भूमि को पूर्व में राजस्व अधिकारियों द्वारा शासकीय भूमि घोषित किया जा चुका है और इस संबंध में सिविल न्यायालय द्वारा दिनांक 27.11.2024 को पारित निर्णय एवं डिक्री में भी शासकीय भूमि की स्थिति को बरकरार रखा गया। याचिका में इसी आधार पर संबंधित भूमि के स्वामित्व एवं राजस्व अभिलेखों की स्थिति की व्यापक जांच की मांग की गई है।


जनहित याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि संबंधित भूमि को राजस्व अभिलेखों में पुनः शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किया जाए तथा भूमि पर किसी भी प्रकार की विकास अथवा भवन निर्माण अनुमति प्रदान नहीं की जाए। इसके साथ ही भूमि को श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग सुविधा के रूप में सुरक्षित रखने, लंबित राजस्व प्रकरण का समयबद्ध निराकरण करने तथा भूमि के कथित रूप से निजी स्वामित्व में दर्ज किए जाने की परिस्थितियों की जांच करने की मांग की गई है।


अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने बताया कि यह मामला किसी निजी व्यक्ति के व्यक्तिगत हित से संबंधित न होकर उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा, सार्वजनिक पार्किंग व्यवस्था, शासकीय भूमि की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण जनहित का विषय है। उन्होंने कहा कि याचिका में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, संबंधित अधिकारियों की रिपोर्टों एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच और सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

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