दिवाली के त्योहार पर इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा बाजार में रौनक बढ़ गई है। तोरण, दीये, रंगोली और सजावटी सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इस बाजार की रौनक के साथ छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं की रोजी-रोटी भी जुड़ी है।
इंदौर। यूं तो शहर का दिल कहे जाने वाले राजवाड़ा में साल के 365 दिन चहल-पहल रहती है, लेकिन दिवाली का त्योहार इस रौनक में चार चांद लगा देता है। त्योहार नजदीक आते ही राजवाड़ा के आसपास का बाजार रंग-बिरंगी रोशनी, सजावटी सामान और खरीदारों की भीड़ से गुलजार हो उठता है। यहां की रौनक देखकर लगता है मानो पूरे शहर की दिवाली इसी बाजार में उतर आई हो।
कोई अपने घर को सजाने के लिए तोरण, पर्दे और रंगोली खरीद रहा है, तो कोई मिट्टी के दीये और दीपावली की सजावट का सामान तलाश रहा है। बाजार में जगह-जगह सजी दुकानों और अस्थायी स्टॉल पर खरीदारों की आवाजाही बनी हुई है। परिवार के साथ खरीदारी करने पहुंचे लोग त्योहार की तैयारियों में जुटे नजर आ रहे हैं।
लेकिन राजवाड़ा की इस रौनक के पीछे कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है। यहां छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर व्यापारी और फुटकर विक्रेता दीये, तोरण, बंदनवार, पर्दे, रंगोली और सजावट का सामान बेच रहे हैं। दिवाली का यह सीजन उनके लिए साल की कमाई का एक अहम मौका लेकर आता है। किसी के लिए यह त्योहार घर को रोशन करने की खुशी है, तो किसी के लिए परिवार का चूल्हा जलाने की उम्मीद।
यही तो खासियत है इंदौर के राजवाड़ा की। यहां सिर्फ खरीदारी नहीं होती, बल्कि त्योहार की खुशियां, बाजार की रौनक और सैकड़ों लोगों की मेहनत एक साथ नजर आती है। यूं ही नहीं राजवाड़ा को इंदौर का दिल कहा जाता है... दिवाली में इस दिल की धड़कन कुछ और तेज हो जाती है।
— तन्मय मालवीय

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