भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मरीजों और निजी अस्पतालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए 1 अक्टूबर से नियम कड़े करने जा रही है।
नए नियम के तहत प्रदेश के 4 बड़े मेट्रो शहर - भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अब आयुष्मान योजना के तहत इलाज तभी हो पाएगा जब अस्पताल के पास *फुल NABH (National Accreditation Board for Hospitals)* का फाइनल सर्टिफिकेट होगा। अभी तक कई अस्पताल एंट्री लेवल NABH पर आयुष्मान के पैकेज ले रहे थे। सरकार ने उन्हें 6 महीने की छूट दी थी, जो 30 सितंबर को खत्म हो रही है।
नए नियम में ये होगा अनिवार्य
1. मेडिसिन पैकेज के लिए फुल NABH अनिवार्य होगा।
2. बाकी सभी पैकेज के लिए भी कम से कम एंट्री लेवल NABH जरूरी होगा, और 6 महीने के अंदर फुल NABH लेना होगा।
3. मेट्रो शहरों के बाहर के जिलों के लिए फुल NABH अनिवार्य नहीं है। वहां DQACC में 70 अंक लाने पर और 50 बिस्तर वाले अस्पताल को CMHO की रिपोर्ट पर मान्यता मिल सकेगी। ट्राइबल इलाकों में बिना NABH के भी इलाज जारी रहेगा।
नए मानक पूरे न करने पर चारों शहरों के करीब 289 अस्पताल आयुष्मान लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा असर भोपाल में दिखेगा। भोपाल में आयुष्मान से जुड़े 163 अस्पतालों में से सिर्फ 24 के पास फुल NABH है, बाकी 139 अस्पताल अभी भी एंट्री लेवल पर चल रहे हैं। जिन अस्पतालों के पास ज्यादा पैकेज हैं, उन्होंने अब तेजी से एंट्री लेवल और फुल NABH के लिए आवेदन शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि NABH में 600 से ज्यादा मानकों पर जांच होती है - मरीज सुरक्षा, साफ-सफाई, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी और सर्जरी की गुणवत्ता तथा फुल NABH वाले अस्पतालों को क्लेम का 115% तक भुगतान भी मिलेगा।

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