इधर अनशन, उधर चौराहे पर लगा स्वागत द्वार गिरा

  • तबीयत बिगड़ने पर प्रह्लाद पांडेय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती, 
  • उपचार से इनकार; मांग पूरी होने तक जल-अनशन जारी रखने का निर्णय

इंदौर। शहर में नियम-विरुद्ध बैनर, पोस्टर, होर्डिंग एवं स्वागत द्वार हटाने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से जल-अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता श्री प्रह्लाद पांडेय की आज तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

चिकित्सकों द्वारा तत्काल उपचार लेने की सलाह दिए जाने के बावजूद श्री पांडेय ने उपचार लेने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों द्वारा काफी समझाने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों के अनुरूप शहर से नियम-विरुद्ध अवैध होर्डिंग, बैनर, पोस्टर एवं स्वागत द्वार हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अस्पताल में भी अपना जल-अनशन जारी रखेंगे।

चिकित्सकों द्वारा इस संबंध में उनसे लिखित सहमति लिए जाने पर श्री पांडेय ने अपना लिखित कथन दिया है। अपने लिखित कथन में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि अनशन के दौरान उनके अंगों अथवा शरीर को किसी भी प्रकार की क्षति होती है तो उसकी जिम्मेदारी समस्त जिम्मेदार कर्मचारी एवं अधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों की होगी व जनप्रतिनिधियों की होगी जिसमें जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं महापौर, इंदौर सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं।

कल प्रशासन ने अनशन स्थल पर पहुंचकर की थी चर्चा

गौरतलब है कि एक दिन पूर्व रीगल चौराहा स्थित अनशन स्थल पर एसडीएम श्री धनकर, तहसीलदार तथा नगर निगम की रिमूवल टीम के अधिकारी बबलू कल्याणे पहुंचे थे। अधिकारियों ने श्री पांडेय से चर्चा कर उन्हें जानकारी दी थी कि नगर निगम द्वारा शहर में नियम-विरुद्ध पाए जा रहे बैनर, पोस्टर एवं होर्डिंग हटाने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। इस दौरान श्री बबलू कल्याणे द्वारा नगर निगम की ओर से लगभग 30–40 स्थानों पर की गई कार्रवाई के फोटोग्राफ भी श्री पांडेय को दिखाए गए थे।

श्री पांडेय ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए आग्रह किया था कि कार्रवाई निरंतर, व्यापक और निष्पक्ष रूप से जारी रहनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक इसका प्रभाव पूरे शहर में दिखाई नहीं देता, तब तक केवल आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

पाटनीपुरा में बड़ा स्वागत द्वार गिरने की घटना

इसी बीच आज पाटनीपुरा चौराहे पर एक बड़ा स्वागत द्वार गिरने की घटना सामने आई, जिसकी चपेट में आने से एक रिक्शा और बाइक सवार के घायल होने की सूचना है।यह घटना सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे बड़े बैनर, होर्डिंग एवं स्वागत द्वारों की सुरक्षा, अनुमति और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

श्री प्रह्लाद पांडेय पिछले लगभग दो माह से इसी विषय को लेकर शिकायतें एवं जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं तथा 16 सितंबर से रीगल चौराहे पर जल-अनशन पर बैठे हैं। ऐसे में पाटनीपुरा की घटना ने उनके द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है।

अब आश्वासन नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई की मांग

श्री पांडेय का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल अथवा जनप्रतिनिधि के विरुद्ध नहीं है। उनकी मांग है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए बैनर, पोस्टर, होर्डिंग एवं स्वागत द्वारों की जांच की जाए और जो नियम-विरुद्ध पाए जाएं, उन्हें नियमानुसार हटाया जाए।

उनका कहना है कि नगर निगम द्वारा कार्रवाई प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी गई है, लेकिन कार्रवाई का प्रभाव पूरे शहर में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति के बावजूद श्री पांडेय ने फिलहाल अपना जल-अनशन समाप्त करने से इनकार किया है और कहा है कि जब उन्हें यह संतोष होगा कि नगर निगम द्वारा नियम-विरुद्ध होर्डिंग, बैनर, पोस्टर एवं स्वागत द्वारों के विरुद्ध वास्तविक, निरंतर और निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है, तभी वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

“कल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू होने की जानकारी दी और आज पाटनीपुरा में बड़ा स्वागत द्वार गिरने की घटना सामने आई। अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि ऐसी प्रभावी कार्रवाई की है जिसका असर पूरे इंदौर में दिखाई दे।”

शहर सुरक्षित हो, सार्वजनिक स्थान नियमों के अनुरूप हों और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो—यही श्री प्रह्लाद पांडेय के आंदोलन का मूल उद्देश्य है।

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