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इंदौर। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय ने थाना बाणगंगा के विशेष प्रकरण क्रमांक 171/2024 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी उम्र 29 वर्ष निवासी, इंदौर को 5/6, 3/4 पॉक्सो अधिनियम में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास व धारा 342 भारतीय दण्ड संहिता में 3 माह का सादा कारावास और कुल 21,000/- रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुश्री सीमा शर्मा द्वारा की गयी। वहीं पीड़ित प्रतिकर योजनान्तर्गत माननीय न्यायालय द्वारा पीड़ित को हुयी मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए चार लाख रुपये की राशि प्रदाय करने बाबत अनुशंसा की गयी।
न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में कहा गया कि सौतेले पिता होते हुए और ऐसा दुष्साहस करने वाले सौतेले पिता आरोपी के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूती नही दिखायी जा सकती है। वर्तमान समय में बालकों के प्रति बढते हुए अपराधों की संख्या, असुरक्षा एवं अपराध के कारण उनके वर्तमान एवं भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव तथा प्रकरण की परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए तथा अपराध के स्वरूप को देखते हुए अभियुक्त को शिक्षाप्रद दण्ड से दण्डित करना आवश्यक है।
यह था मामला
25.05.2024 को बालिका ने अपनी मां के साथ आकर इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह और उसके भाई-बहन घर पर थे उसकी मम्मी जॉब पर गई थी उसके दोनों भाई-बहन अंदर बेडरूम में मस्ती कर रहे थे तभी उसके सौतेले पिता घर पर आये और बेडरूम के दोनो तरफ के दरवाजे बंद कर दिये और मोबाइल पर तेज गाने बजा दिये। सौतेले पिता ने उसके साथ जबरदस्ती गलत काम (बलात्कार) किया। वह जोर से रोने लगी और आरोपी से खुद को छुड़ाकर बाथरूम में चली गई, उसे खुद से बहुत घिन आ रही थी, उसने तुरंत नहाया वह बहुत डर गई थी और वह पड़ोस की आंटी के यहां गई एवं उनसे कहा कि उसे मम्मी से बात करना है, उसने उसकी मम्मी को कॉल किया था, किंतु उसने फोन नहीं उठाया, वह रो रही थी तो आंटी के पूछने पर उसने सारी बात बताई तभी मम्मी का कॉल भी आ गया था तो आंटी ने उसकी मम्मी को सारी बात बताई थी। उसके सौतेले पिता ने पहले भी उसके साथ छेड़खानी की थी, परंतु वह छोड़कर जाने की धमकी देता है तो उसकी मम्मी की हालत खराब हो जाती है। उसका एवं उसके भाई-बहन का मम्मी के अलावा कोई नहीं है, इसलिए उसने पहले यह बात मम्मी को नहीं बताई थी कि पापा उस पर गलत नजर रखते हैं। बालिका की उक्त रिपोर्ट के आधार पर थाना बाणगंगा, जिला इंदौर में अपराध कमांक 717/2024 पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 342, 354, 354-क, 376(2) (के), 376 (2) (एफ) एवं धारा 3/4, 5 (एन)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध अभियुक्त के विरुद्ध पंजीबद्ध कर विवेचना आरंभ की गई। विवेचना के दौरान बालिका के कथन लेखबद्ध किए गए एवं मेडीकल परीक्षण कराया गया व अन्य साक्षीगणो के कथन लेखबद्ध किए गए अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया संपूर्ण विवेचना पश्चात् अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण मे अभियोजन द्वारा 10 साक्षियों की साक्ष्य करायी एवं न्यायालय के समक्ष अपने मामले को प्रमाणित किया जिससे सहमत होकर न्यायालय द्वारा अभियुक्त को दोषी पाते हुये उक्त दण्ड से दंण्डित किया गया।

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