नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 49 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन शनिवार को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया। आंदोलन समाप्त करने का फैसला केंद्र सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत और प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद लिया गया।
सरकार और CJP नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन "गुड फेथ" यानी सरकार के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन वापस ले रहा है। उन्होंने कहा कि यदि तय समयसीमा में वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन दोबारा शुरू करने का विकल्प खुला रहेगा।
क्यों खत्म हुआ आंदोलन?
CJP का कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आंदोलनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करना, पेपर लीक विवाद से जुड़े छात्र आत्महत्या मामलों के पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति तथा परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू करना शामिल है।
आंदोलन की सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। उनके पद छोड़ने के कुछ घंटे बाद ही CJP और सरकार के बीच अंतिम दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
आगे क्या होगा?
CJP ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन भले समाप्त हो गया हो, लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। संगठन और केंद्र सरकार के बीच चार सप्ताह बाद फिर बैठक होगी, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने के उपाय और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के रोडमैप पर चर्चा की जाएगी। सरकार CJP के पांच सूत्रीय चार्टर पर भी विचार करेगी।
देशभर के प्रदर्शन भी वापस
CJP ने केवल जंतर-मंतर ही नहीं, बल्कि देशभर में चल रहे अपने सभी धरने और प्रदर्शन भी तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की है। संगठन ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील की और कहा कि अब सरकार के आश्वासनों के अमल पर नजर रखी जाएगी।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने बातचीत का नेतृत्व किया। सरकार ने कहा कि CJP द्वारा दिए गए सुझावों और पांच सूत्रीय चार्टर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों पर आगे काम होगा।
ऐतिहासिक रहा आंदोलन
करीब एक महीने तक चला यह आंदोलन हाल के वर्षों में छात्रों और युवाओं के सबसे बड़े आंदोलनों में माना जा रहा है। पेपर लीक विवाद से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे शिक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय मांग में बदल गया। आंदोलन समाप्त होने के बावजूद CJP ने साफ किया है कि यदि सरकार ने वादे पूरे नहीं किए तो वह दोबारा सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।

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