दिग्विजय सिंह की यात्रा का उद्देश्य: राम मंदिर, RSS की फंडिंग और प्राण प्रतिष्ठा पर उठाए सवाल

20 ऑक्टोबर से दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू होने वाली है, जिसका उद्देश्य वोट चोरी और धार्मिक स्थलों के चंदे-चढ़ावे में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग उठाना है। यात्रा के दौरान उन्होंने राम मंदिर निर्माण, RSS की फंडिंग और प्राण प्रतिष्ठा की धार्मिक परंपराओं पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य बताते हुए कहा कि राम जन्मभूमि के मुद्दे का किस तरह राजनीतिक लाभ उठाया गया, यह सभी ने देखा है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए धन, भाजपा और RSS के भवनों तथा संगठन की फंडिंग को लेकर सवाल उठाए।

दिग्विजय सिंह ने बताया कि रामशिला पूजन और राम मंदिर निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये आए। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा और RSS के बड़े-बड़े भवन बन रहे हैं, तो इन गतिविधियों के लिए धन कहां से आ रहा है। उन्होंने RSS के पंजीकरण का मुद्दा उठाते हुए कोविड काल में संगठन की ओर से 7 करोड़ रुपये दान दिए जाने का भी उल्लेख किया। इस विषय पर उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा था।

प्राण प्रतिष्ठा में यजमान की भूमिका पर सवाल

दिग्विजय सिंह ने हिंदू धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में यजमान के रूप में पति-पत्नी के जोड़े के बैठने की परंपरा है। उन्होंने इसी आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने मोदी के तलाकशुदा होने और योगी आदित्यनाथ तथा RSS प्रमुख मोहन भागवत के अविवाहित होने का उल्लेख किया।

मंदिर के कलश को लेकर भी किया दावा

दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि जब तक मंदिर के शिखर पर कलश स्थापित नहीं होता, तब तक मंदिर का कार्य पूरा नहीं माना जा सकता। राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी मंदिर के अधूरे निर्माण तथा धार्मिक प्रक्रियाओं के पालन पर सवाल उठाए गए थे।

राम मंदिर की जमीन पर भी उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर उस स्थान पर नहीं बना, जहां बाबरी मस्जिद का ढांचा था, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में अधिग्रहित जमीन पर बना है।

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