
इंदौर। दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. जगत नरूला ने बुधवार को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों में करीब एक-तिहाई मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं।
डॉ. नरूला के मुताबिक, बदलती जीवनशैली के साथ प्रदूषण, मोटापा और प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल भी दिल की सेहत के लिए चुनौती बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी बरतकर और रोजमर्रा की आदतों में सुधार करके हृदय रोगों और स्ट्रोक के लगभग 80 प्रतिशत असामयिक मामलों को रोका जा सकता है।
उन्होंने लोगों को रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलने या व्यायाम करने, खानपान में सुधार लाने और जंक फूड, ज्यादा नमक व चीनी से दूरी रखने की सलाह दी। साथ ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराने पर जोर दिया।
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