इंदौर। बढ़ता स्क्रीन टाइम, लंबे समय तक बैठना, गलत पॉश्चर और शारीरिक गतिविधियों में कमी से युवाओं में घुटने, कमर और रीढ़ की समस्याएं बढ़ रही हैं।
इंदौर। लंबे समय तक बैठकर काम करना, बढ़ता स्क्रीन टाइम, गलत पॉश्चर, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी का असर अब युवाओं की हड्डियों और जोड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक घुटने, कमर, गर्दन और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं।इसी विषय पर इंदौर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान घुटने, कूल्हे, रीढ़, कंधे, स्पोर्ट्स इंजरी और आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीकों पर चर्चा हुई।
शैल्बी हॉस्पिटल्स के संस्थापक और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने कहा कि लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल, गलत तरीके से बैठना और कम शारीरिक गतिविधि युवाओं में कम उम्र में ही कमर, गर्दन और घुटनों से जुड़ी समस्याओं का कारण बन रही है।

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