प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों नहीं, शरीर के दूसरे अंगों को भी करता है प्रभावित

इंदौर। ICAAICON 2026 का शनिवार को समापन हुआ। चार दिवसीय सम्मेलन में 500 से ज्यादा विशेषज्ञों ने एलर्जी, अस्थमा और वायु प्रदूषण पर चर्चा की।

इंदौर। इंदौर में चार दिन तक चले ICAAICON 2026 का शनिवार को समापन हो गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से 500 से ज्यादा डॉक्टर, विशेषज्ञ और शोधार्थी शामिल हुए। सम्मेलन में एलर्जी, अस्थमा, वायु प्रदूषण और इनके इलाज में इस्तेमाल हो रही नई तकनीकों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में प्रदूषण को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि खराब हवा को सिर्फ दिल्ली या उत्तर भारत की समस्या मानना सही नहीं है। मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि देश का बड़ा हिस्सा (58%) प्रदूषण से प्रभावित है और इसका असर पूरे साल स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।


उन्होंने कहा कि प्रदूषण सिर्फ सांस और फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। हवा में मौजूद प्रदूषक रक्त के जरिए शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी इसका असर पड़ने की बात विशेषज्ञों ने कही।

ICAAI के सचिव डॉ. राज कुमार ने कहा कि सांस से जुड़ी हर बीमारी को एलर्जी नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर भारत के मुकाबले फिलहाल इंदौर की स्थिति बेहतर है।

सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. सलिल भार्गव ने कहा कि आयोजन का मकसद प्रदूषण और उन कारणों पर चर्चा करना था, जिनसे एलर्जी और फेफड़ों की समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए प्रदूषण रोकने और लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।

सम्मेलन में एलर्जी की पहचान और इलाज को लेकर विशेष कार्यशाला भी हुई। इसमें आधुनिक जांच और उपचार के तरीकों की जानकारी दी गई। जयपुर के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कूलवाल को एलर्जी और श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए ICAAI Life Time Achievement Award 2026 से सम्मानित किया गया।

समापन के दौरान आम लोगों के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम रखा गया। विशेषज्ञों ने एलर्जी, अस्थमा, फूड और ड्रग एलर्जी समेत मौसमी एलर्जी से जुड़े सवालों के जवाब दिए और धूल, परागकण, डस्ट माइट्स तथा बदलते मौसम से बचाव के तरीके बताए।

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